svapuraṃ tena saṃruddhaṃ svajanaṃ ca bhayākulam|| 5
अर्थ
भगवान् श्रीकृष्णने देखा—जरासन्धकी सेना क्या है, उमड़ता हुआ समुद्र है। उन्होंने यह भी देखा कि उसने चारों ओरसे हमारी राजधानी घेर ली है और हमारे स्वजन तथा पुरवासी भयभीत हो रहे हैं॥ ५॥✎ 1682
निरीक्ष्य तद्बलं कृष्ण उद्वेलमिव सागरम्।
स्वपुरं तेन संरुद्धं स्वजनं च भयाकुलम्॥ ५
भगवान् श्रीकृष्णने देखा—जरासन्धकी सेना क्या है, उमड़ता हुआ समुद्र है। उन्होंने यह भी देखा कि उसने चारों ओरसे हमारी राजधानी घेर ली है और हमारे स्वजन तथा पुरवासी भयभीत हो रहे हैं॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.50.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 445) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/50/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)