एक बार इन्द्रादि देवता असुरोंसे अत्यन्त भयभीत हो गये थे। उन्होंने अपनी रक्षाके लिये राजा मुचुकुन्दसे प्रार्थना की और उन्होंने बहुत दिनोंतक उनकी रक्षा की॥ १५॥
स याचितः सुरगणैरिन्द्राद्यैरात्मरक्षणे।
असुरेभ्यः परित्रस्तैस्तद्रक्षां सोऽकरोच्चिरम्॥ १५
एक बार इन्द्रादि देवता असुरोंसे अत्यन्त भयभीत हो गये थे। उन्होंने अपनी रक्षाके लिये राजा मुचुकुन्दसे प्रार्थना की और उन्होंने बहुत दिनोंतक उनकी रक्षा की॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.51.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 454) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/51/15/