राजन्! सनक-सनन्दन आदि परमर्षिगण मेरे त्रिकालसिद्ध जन्म और कर्मोंका वर्णन करते रहते हैं, परन्तु कभी उनका पार नहीं पाते॥ ३९॥
कालत्रयोपपन्नानि जन्मकर्माणि मे नृप।
अनुक्रमन्तो नैवान्तं गच्छन्ति परमर्षयः॥ ३९
राजन्! सनक-सनन्दन आदि परमर्षिगण मेरे त्रिकालसिद्ध जन्म और कर्मोंका वर्णन करते रहते हैं, परन्तु कभी उनका पार नहीं पाते॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.51.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 456) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/51/39/