श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.51.41

दशम स्कन्ध · अध्याय 51 · अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

अवतीर्णो यदुकुले गृह आनकदुन्दुभेः।

वदन्ति वासुदेवेति वसुदेवसुतं हि माम्॥ ४१

avatīrṇo yadukule gṛha ānakadundubheḥ|

vadanti vāsudeveti vasudevasutaṃ hi mām|| 41

अर्थ

उन्हींकी प्रार्थनासे मैंने यदुवंशमें वसुदेवजीके यहाँ अवतार ग्रहण किया है। अब मैं वसुदेवजीका पुत्र हूँ, इसलिये लोग मुझे ‘वासुदेव’ कहते हैं॥ ४१॥

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