जब भगवान्ने देखा कि पर्वतके छोर जलने लगे हैं, तब दोनों भाई जरासन्धकी सेनाके घेरेको लाँघते हुए बड़े वेगसे उस ग्यारह योजन (चौवालीस कोस) ऊँचे पर्वतसे एकदम नीचे धरतीपर कूद आये॥ १२॥✎ 1685
तत उत्पत्य तरसा दह्यमानतटादुभौ।
दशैकयोजनोत्तुंगान्निपेततुरधो भुवि॥ १२
जब भगवान्ने देखा कि पर्वतके छोर जलने लगे हैं, तब दोनों भाई जरासन्धकी सेनाके घेरेको लाँघते हुए बड़े वेगसे उस ग्यारह योजन (चौवालीस कोस) ऊँचे पर्वतसे एकदम नीचे धरतीपर कूद आये॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.52.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 462) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/52/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)