यह बात मैं तुमसे पहले ही (नवम स्कन्धमें) कह चुका हूँ कि आनर्तदेशके राजा श्रीमान् रैवतजीने अपनी रेवती नामकी कन्या ब्रह्माजीकी प्रेरणासे बल-रामजीके साथ ब्याह दी॥ १५॥
आनर्ताधिपतिः श्रीमान् रैवतो रेवतीं सुताम्।
ब्रह्मणा चोदितः प्रादाद् बलायेति पुरोदितम्॥ १५
यह बात मैं तुमसे पहले ही (नवम स्कन्धमें) कह चुका हूँ कि आनर्तदेशके राजा श्रीमान् रैवतजीने अपनी रेवती नामकी कन्या ब्रह्माजीकी प्रेरणासे बल-रामजीके साथ ब्याह दी॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.52.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 462) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/52/15/