श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.52.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 52 · अथ द्विपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

स वीक्ष्य क्षुल्लकान् मर्त्यान् पशून् वीरुद्वनस्पतीन्।

मत्वा कलियुगं प्राप्तं जगाम दिशमुत्तराम्॥ २

sa vīkṣya kṣullakān martyān paśūn vīrudvanaspatīn|

matvā kaliyugaṃ prāptaṃ jagāma diśamuttarām|| 2

अर्थ

उन्होंने बाहर आकर देखा कि सब-के-सब मनुष्य, पशु, लता और वृक्ष-वनस्पति पहलेकी अपेक्षा बहुत छोटे-छोटे आकारके हो गये हैं। इससे यह जानकर कि कलियुग आ गया, वे उत्तर दिशाकी ओर चल दिये॥ २॥✎ 1684

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1684 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: गन्ध-मादन → गन्धमादन

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें