भगवान् नर-नारायणके नित्य निवासस्थान बदरिकाश्रममें जाकर बड़े शान्त-भावसे गर्मी-सर्दी आदि द्वन्द्व सहते हुए वे तपस्याके द्वारा भगवान्की आराधना करने लगे॥ ४॥✎ 1684
बदर्याश्रममासाद्य नरनारायणालयम्।
सर्वद्वन्द्वसहः शान्तस्तपसाऽऽराधयद्धरिम्॥ ४
भगवान् नर-नारायणके नित्य निवासस्थान बदरिकाश्रममें जाकर बड़े शान्त-भावसे गर्मी-सर्दी आदि द्वन्द्व सहते हुए वे तपस्याके द्वारा भगवान्की आराधना करने लगे॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.52.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 461) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/52/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)