श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.53.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 53 · अथ त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

योत्स्यामः संहतास्तेन इति निश्‍चितमानसाः।

आजग्मुर्भूभुजः सर्वे समग्रबलवाहनाः॥ १९

yotsyāmaḥ saṃhatāstena iti niścitamānasāḥ|

ājagmurbhūbhujaḥ sarve samagrabalavāhanāḥ|| 19

अर्थ

वे सब राजा श्रीकृष्ण और बलरामजीके विरोधी थे और राजकुमारी रुक्मिणी शिशुपालको ही मिले, इस विचारसे आये थे। उन्होंने अपने-अपने मनमें यह पहलेसे ही निश्‍चय कर रखा था कि यदि श्रीकृष्ण बलराम आदि यदुवंशियोंके साथ आकर कन्याको हरनेकी चेष्टा करेगा तो हम सब मिलकर उससे लड़ेंगे। यही कारण था कि उन राजाओंने अपनी-अपनी पूरी सेना और रथ, घोड़े, हाथी आदि भी अपने साथ ले लिये थे॥ १८-१९॥

यह अर्थ श्लोक 18–19 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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