श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.54.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 54 · अथ चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

विकत्थमानः कुमतिरीश्‍वरस्याप्रमाणवित्।

रथेनैकेन गोविन्दं तिष्ठ तिष्ठेत्यथाह्वयत्॥ २३

vikatthamānaḥ kumatirīśvarasyāpramāṇavit|

rathenaikena govindaṃ tiṣṭha tiṣṭhetyathāhvayat|| 23

अर्थ

परीक्षित्! रुक्मीकी बुद्धि बिगड़ गयी थी। वह भगवान्‌के तेज-प्रभावको बिलकुल नहीं जानता था। इसीसे इस प्रकार बहक-बहककर बातें करता हुआ वह एक ही रथसे श्रीकृष्णके पास पहुँचकर ललकारने लगा—‘खड़ा रह! खड़ा रह!’॥ २३॥

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