अब रुक्मी क्रोधवश हाथमें तलवार लेकर भगवान् श्रीकृष्णको मार डालनेकी इच्छासे रथसे कूद पड़ा और इस प्रकार उनकी ओर झपटा, जैसे पतिंगा आगकी ओर लपकता है॥ ३०॥
ततो रथादवप्लुत्य खड्गपाणिर्जिघांसया।
कृष्णमभ्यद्रवत् क्रुद्धः पतंग इव पावकम्॥ ३०
अब रुक्मी क्रोधवश हाथमें तलवार लेकर भगवान् श्रीकृष्णको मार डालनेकी इच्छासे रथसे कूद पड़ा और इस प्रकार उनकी ओर झपटा, जैसे पतिंगा आगकी ओर लपकता है॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.54.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 477) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/54/30/