भगवान्ने हँसकर कहा—‘सुन्दरी! डरो मत। तुम्हारी सेना अभी तुम्हारे शत्रुओंकी सेनाको नष्ट किये डालती है’॥ ५॥✎ 16882111
प्रहस्य भगवानाह मा स्म भैर्वामलोचने।
विनंक्ष्यत्यधुनैवैतत् तावकैः शात्रवं बलम्॥ ५
भगवान्ने हँसकर कहा—‘सुन्दरी! डरो मत। तुम्हारी सेना अभी तुम्हारे शत्रुओंकी सेनाको नष्ट किये डालती है’॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.54.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 474) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/54/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)