श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.54.53

दशम स्कन्ध · अध्याय 54 · अथ चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

भगवान् भीष्मकसुतामेवं निर्जित्य भूमिपान्।

पुरमानीय विधिवदुपयेमे कुरूद्वह॥ ५३

bhagavān bhīṣmakasutāmevaṃ nirjitya bhūmipān|

puramānīya vidhivadupayeme kurūdvaha|| 53

अर्थ

परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने इस प्रकार सब राजाओंको जीत लिया और विदर्भराजकुमारी रुक्मिणीजीको द्वारकामें लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया॥ ५३॥✎ 892 1689

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #892 शब्दोंके बीचका स्थान: लगा।क्यों → लगा। क्यों
  • #1689 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: द्वारका-पुरीमें → द्वारकापुरीमें

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