परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने इस प्रकार सब राजाओंको जीत लिया और विदर्भराजकुमारी रुक्मिणीजीको द्वारकामें लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया॥ ५३॥✎ 8921689
भगवान् भीष्मकसुतामेवं निर्जित्य भूमिपान्।
पुरमानीय विधिवदुपयेमे कुरूद्वह॥ ५३
परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने इस प्रकार सब राजाओंको जीत लिया और विदर्भराजकुमारी रुक्मिणीजीको द्वारकामें लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया॥ ५३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.54.53 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 480) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/54/53/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)