श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.54.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 54 · अथ चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

पेतुः शिरांसि रथिनामश्‍विनां गजिनां भुवि।

सकुण्डलकिरीटानि सोष्णीषाणि च कोटिशः॥ ७

petuḥ śirāṃsi rathināmaśvināṃ gajināṃ bhuvi|

sakuṇḍalakirīṭāni soṣṇīṣāṇi ca koṭiśaḥ|| 7

अर्थ

उनके बाणोंसे रथ, घोड़े और हाथियोंपर बैठे विपक्षी वीरोंके कुण्डल, किरीट और पगड़ियोंसे सुशोभित करोड़ों सिर, खड्ग, गदा और धनुषयुक्त हाथ, पहुँचे, जाँघें और पैर कट-कटकर पृथ्वीपर गिरने लगे। इसी प्रकार घोड़े, खच्चर, हाथी, ऊँट, गधे और मनुष्योंके सिर भी कट-कटकर रणभूमिमें लोटने लगे॥ ७-८॥✎ 1688 2111

यह अर्थ श्लोक 7–8 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1688 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: रण-भूमिमें → रणभूमिमें
  • #2111 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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