श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.54.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 54 · अथ चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

हन्यमानबलानीका वृष्णिभिर्जयकांक्षिभिः।

राजानो विमुखा जग्मुर्जरासन्धपुरःसराः॥ ९

hanyamānabalānīkā vṛṣṇibhirjayakāṃkṣibhiḥ|

rājāno vimukhā jagmurjarāsandhapuraḥsarāḥ|| 9

अर्थ

अन्तमें विजयकी सच्ची आकांक्षावाले यदुवंशियोंने शत्रुओंकी सेना तहस-नहस कर डाली। जरासन्ध आदि सभी राजा युद्धसे पीठ दिखाकर भाग खड़े हुए॥ ९॥✎ 1688 2111

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1688 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: रण-भूमिमें → रणभूमिमें
  • #2111 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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