नारदजीके द्वारा यह महान् आश्चर्यमयी घटना सुनकर भगवान् श्रीकृष्णके अन्तःपुरकी स्त्रियाँ चकित हो गयीं और बहुत वर्षोंतक खोये रहनेके बाद लौटे हुए प्रद्युम्नजीका इस प्रकार अभिनन्दन करने लगीं, मानो कोई मरकर जी उठा हो॥ ३७॥
तच्छ्रुत्वा महदाश्चर्यं कृष्णान्तःपुरयोषितः।
अभ्यनन्दन् बहूनब्दान् नष्टं मृतमिवागतम्॥ ३७
नारदजीके द्वारा यह महान् आश्चर्यमयी घटना सुनकर भगवान् श्रीकृष्णके अन्तःपुरकी स्त्रियाँ चकित हो गयीं और बहुत वर्षोंतक खोये रहनेके बाद लौटे हुए प्रद्युम्नजीका इस प्रकार अभिनन्दन करने लगीं, मानो कोई मरकर जी उठा हो॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 485) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/55/37/