श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.56.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 56 · अथ षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

स वै भगवता तेन युयुधे स्वामिनाऽऽत्मनः।

पुरुषं प्राकृतं मत्वा कुपितो नानुभाववित्॥ २२

sa vai bhagavatā tena yuyudhe svāminā''tmanaḥ|

puruṣaṃ prākṛtaṃ matvā kupito nānubhāvavit|| 22

अर्थ

परीक्षित्! जाम्बवान् उस समय कुपित हो रहे थे। उन्हें भगवान्‌की महिमा, उनके प्रभावका पता न चला। उन्होंने उन्हें एक साधारण मनुष्य समझ लिया और वे अपने स्वामी भगवान् श्रीकृष्णसे युद्ध करने लगे॥ २२॥✎ 2114

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