शतधन्वा पैदल ही भाग रहा था, इसलिये भगवान्ने भी पैदल ही दौड़कर अपने तीक्ष्ण धारवाले चक्रसे उसका सिर उतार लिया और उसके वस्त्रोंमें स्यमन्तकमणिको ढूँढ़ा॥ २१॥
पदातेर्भगवांस्तस्य पदातिस्तिग्मनेमिना।
चक्रेण शिर उत्कृत्य वाससो व्यचिनोन्मणिम्॥ २१
शतधन्वा पैदल ही भाग रहा था, इसलिये भगवान्ने भी पैदल ही दौड़कर अपने तीक्ष्ण धारवाले चक्रसे उसका सिर उतार लिया और उसके वस्त्रोंमें स्यमन्तकमणिको ढूँढ़ा॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.57.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 493) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/57/21/