श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.57.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 57 · अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

पदातेर्भगवांस्तस्य पदातिस्तिग्मनेमिना।

चक्रेण शिर उत्कृत्य वाससो व्यचिनोन्मणिम्॥ २१

padāterbhagavāṃstasya padātistigmaneminā|

cakreṇa śira utkṛtya vāsaso vyacinonmaṇim|| 21

अर्थ

शतधन्वा पैदल ही भाग रहा था, इसलिये भगवान्‌ने भी पैदल ही दौड़कर अपने तीक्ष्ण धारवाले चक्रसे उसका सिर उतार लिया और उसके वस्त्रोंमें स्यमन्तकमणिको ढूँढ़ा॥ २१॥

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