श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.57.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 57 · अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तैलद्रोण्यां मृतं प्रास्य जगाम गजसाह्वयम्।

कृष्णाय विदितार्थाय तप्ताऽऽचख्यौ पितुर्वधम्॥ ८

tailadroṇyāṃ mṛtaṃ prāsya jagāma gajasāhvayam|

kṛṣṇāya viditārthāya taptā''cakhyau piturvadham|| 8

अर्थ

इसके बाद उन्होंने अपने पिताके शवको तेलके कड़ाहेमें रखवा दिया और आप हस्तिनापुरको गयीं। उन्होंने बड़े दुःखसे भगवान् श्रीकृष्णको अपने पिताकी हत्याका वृत्तान्त सुनाया—यद्यपि इन बातोंको भगवान् श्रीकृष्ण पहलेसे ही जानते थे॥ ८॥

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