श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

तमाह भगवान् हृष्टः१ कृतासनपरिग्रहः।

मेघगम्भीरया वाचा सस्मितं कुरुनन्दन॥ ३९

tamāha bhagavān hṛṣṭaḥ kṛtāsanaparigrahaḥ|

meghagambhīrayā vācā sasmitaṃ kurunandana|| 39

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! राजा न‌ग्‍नजित‍्का दिया हुआ आसन, पूजा आदि स्वीकार करके भगवान् श्रीकृष्ण बहुत सन्तुष्ट हुए। उन्होंने मुसकराते हुए मेघके समान गम्भीर वाणीसे कहा॥ ३९॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    कृष्णः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 501)

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