राजा नग्नजित्को बड़ा विस्मय हुआ। उन्होंने प्रसन्न होकर भगवान् श्रीकृष्णको अपनी कन्याका दान कर दिया और सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णने भी अपने अनुरूप पत्नी सत्याका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया॥ ४७॥
ततः प्रीतः सुतां राजा ददौ कृष्णाय विस्मितः।
तां प्रत्यगृह्णाद् भगवान् विधिवत् सदृशीं प्रभुः॥ ४७
राजा नग्नजित्को बड़ा विस्मय हुआ। उन्होंने प्रसन्न होकर भगवान् श्रीकृष्णको अपनी कन्याका दान कर दिया और सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णने भी अपने अनुरूप पत्नी सत्याका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.58.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 502) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/58/47/