श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तथैव सात्यकिः पार्थैः पूजितश्‍चाभिवन्दितः।

निषसादासनेऽन्ये च पूजिताः पर्युपासत॥ ६

tathaiva sātyakiḥ pārthaiḥ pūjitaścābhivanditaḥ|

niṣasādāsane'nye ca pūjitāḥ paryupāsata|| 6

अर्थ

पाण्डवोंने भगवान् श्रीकृष्णके समान ही वीर सात्यकिका भी स्वागत-सत्कार और अभिनन्दन-वन्दन किया। वे एक आसनपर बैठ गये। दूसरे यदुवंशियोंका भी यथायोग्य सत्कार किया गया तथा वे भी श्रीकृष्णके चारों ओर आसनोंपर बैठ गये॥ ६॥

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