पाण्डवोंने भगवान् श्रीकृष्णके समान ही वीर सात्यकिका भी स्वागत-सत्कार और अभिनन्दन-वन्दन किया। वे एक आसनपर बैठ गये। दूसरे यदुवंशियोंका भी यथायोग्य सत्कार किया गया तथा वे भी श्रीकृष्णके चारों ओर आसनोंपर बैठ गये॥ ६॥
तथैव सात्यकिः पार्थैः पूजितश्चाभिवन्दितः।
निषसादासनेऽन्ये च पूजिताः पर्युपासत॥ ६
पाण्डवोंने भगवान् श्रीकृष्णके समान ही वीर सात्यकिका भी स्वागत-सत्कार और अभिनन्दन-वन्दन किया। वे एक आसनपर बैठ गये। दूसरे यदुवंशियोंका भी यथायोग्य सत्कार किया गया तथा वे भी श्रीकृष्णके चारों ओर आसनोंपर बैठ गये॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.58.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 497) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/58/6/