॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.59.13
प्रायुंजतासाद्य शरानसीन् गदाः
शक्त्यृष्टिशूलान्यजिते रुषोल्बणाः।
तच्छस्त्रकूटं भगवान् स्वमार्गणै-
रमोघवीर्यस्तिलशश्चकर्त ह॥ १३
prāyuṃjatāsādya śarānasīn gadāḥ
śaktyṛṣṭiśūlānyajite ruṣolbaṇāḥ|
tacchastrakūṭaṃ bhagavān svamārgaṇai-
ramoghavīryastilaśaścakarta ha|| 13
अर्थ
वे वहाँ आकर बड़े क्रोधसे भगवान् श्रीकृष्णपर बाण, खड्ग, गदा, शक्ति, ऋष्टि और त्रिशूल आदि प्रचण्ड शस्त्रोंकी वर्षा करने लगे। परीक्षित्! भगवान्की शक्ति अमोघ और अनन्त है। उन्होंने अपने बाणोंसे उनके कोटि-कोटि शस्त्रास्त्र तिल-तिल करके काट गिराये॥ १३॥