राजन्! इसके बाद पृथ्वीदेवी बड़े-बड़े देवताओंके द्वारा पूजित विश्वेश्वर भगवान् श्रीकृष्णको प्रणाम करके हाथ जोड़कर भक्तिभावभरे हृदयसे उनकी स्तुति करने लगीं॥ २४॥
अस्तौषीदथ विश्वेशं देवी देववरार्चितम्।
प्रांजलिः प्रणता राजन् भक्तिप्रवणया धिया॥ २४
राजन्! इसके बाद पृथ्वीदेवी बड़े-बड़े देवताओंके द्वारा पूजित विश्वेश्वर भगवान् श्रीकृष्णको प्रणाम करके हाथ जोड़कर भक्तिभावभरे हृदयसे उनकी स्तुति करने लगीं॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.59.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 507) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/59/24/