श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.59.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 59 · अथैकोनषष्टितमोऽध्यायः

अस्तौषीदथ विश्‍वेशं देवी देववरार्चितम्।

प्रांजलिः प्रणता राजन् भक्तिप्रवणया धिया॥ २४

astauṣīdatha viśveśaṃ devī devavarārcitam|

prāṃjaliḥ praṇatā rājan bhaktipravaṇayā dhiyā|| 24

अर्थ

राजन्! इसके बाद पृथ्वीदेवी बड़े-बड़े देवताओंके द्वारा पूजित विश्‍वेश्‍वर भगवान् श्रीकृष्णको प्रणाम करके हाथ जोड़कर भक्तिभावभरे हृदयसे उनकी स्तुति करने लगीं॥ २४॥

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