॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.59.36
ताः प्राहिणोद् द्वारवतीं सुमृष्टविरजोऽम्बराः।
नरयानैर्महाकोशान् रथाश्वान् द्रविणं महत्॥ ३६
tāḥ prāhiṇod dvāravatīṃ sumṛṣṭavirajo'mbarāḥ|
narayānairmahākośān rathāśvān draviṇaṃ mahat|| 36
अर्थ
तब भगवान् श्रीकृष्णने उन राजकुमारियोंको सुन्दर-सुन्दर निर्मल वस्त्राभूषण पहनाकर पालकियोंसे द्वारका भेज दिया और उनके साथ ही बहुत-से खजाने, रथ, घोड़े तथा अतुल सम्पत्ति भी भेजी॥ ३६॥