श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.59.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 59 · अथैकोनषष्टितमोऽध्यायः

गत्वा सुरेन्द्रभवनं दत्त्वादित्यै च कुण्डले।

पूजितस्त्रिदशेन्द्रेण सहेन्द्राण्या च सप्रियः॥ ३८

gatvā surendrabhavanaṃ dattvādityai ca kuṇḍale|

pūjitastridaśendreṇa sahendrāṇyā ca sapriyaḥ|| 38

अर्थ

इसके बाद भगवान् श्रीकृष्ण अमरावतीमें स्थित देवराज इन्द्रके महलोंमें गये। वहाँ देवराज इन्द्रने अपनी पत्‍नी इन्द्राणीके साथ सत्यभामाजी और भगवान् श्रीकृष्णकी पूजा की, तब भगवान्‌ने अदितिके कुण्डल उन्हें दे दिये॥ ३८॥

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