श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.61.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 61 · अथैकषष्टितमोऽध्यायः

दीप्तिमांस्ताम्रतप्ताद्या१ रोहिण्यास्तनया हरेः।

प्रद्युम्‍नाच्चानिरुद्धोऽभूद्रुक्मवत्यां महाबलः॥ १८

dīptimāṃstāmrataptādyā rohiṇyāstanayā hareḥ|

pradyumnāccāniruddho'bhūdrukmavatyāṃ mahābalaḥ|| 18

अर्थ

इन पटरानियोंके अतिरिक्त भगवान्‌की रोहिणी आदि सोलह हजार एक सौ और भी पत्‍नियाँ थीं। उनके दीप्तिमान् और ताम्रतप्त आदि दस-दस पुत्र हुए। रुक्मिणीनन्दन प्रद्युम्‍नका मायावती रतिके अतिरिक्त भोजकट-नगर-निवासी रुक्मीकी पुत्री रुक्मवतीसे भी विवाह हुआ था। उसीके गर्भसे परम बलशाली अनिरुद्धका जन्म हुआ। परीक्षित्! श्रीकृष्णके पुत्रोंकी माताएँ ही सोलह हजारसे अधिक थीं। इसलिये उनके पुत्र-पौत्रोंकी संख्या करोड़ोंतक पहुँच गयी॥ १८-१९॥

यह अर्थ श्लोक 18–19 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

टिप्पणियाँ

  1. १

    पत्राद्याः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 522)

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