श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.61.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 61 · अथैकषष्टितमोऽध्यायः

ततो लक्षं रुक्म्यगृह्णाद् ग्लहं तत्राजयद् बलः।

जितवानहमित्याह रुक्मी कैतवमाश्रितः॥ ३०

tato lakṣaṃ rukmyagṛhṇād glahaṃ tatrājayad balaḥ|

jitavānahamityāha rukmī kaitavamāśritaḥ|| 30

अर्थ

इसके बाद रुक्मीने एक लाख मुहरोंका दाँव लगाया। उसे बलरामजीने जीत लिया। परन्तु रुक्मी धूर्ततासे यह कहने लगा कि ‘मैंने जीता है’॥ ३०॥

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