श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.62.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 62 · अथ द्विषष्टितमोऽध्यायः

अथ द्विषष्टितमोऽध्यायः

ऊषा-अनिरुद्ध-मिलन

राजोवाच

बाणस्य तनयामूषामुपयेमे यदूत्तमः।

तत्र युद्धमभूद् घोरं हरिशंकरयोर्महत्।

एतत् सर्वं महायोगिन् समाख्यातुं त्वमर्हसि॥ १

bāṇasya tanayāmūṣāmupayeme yadūttamaḥ|

tatra yuddhamabhūd ghoraṃ hariśaṃkarayormahat|

etat sarvaṃ mahāyogin samākhyātuṃ tvamarhasi|| 1

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—महायोगसम्पन्‍न मुनीश्‍वर! मैंने सुना है कि यदुवंशशिरोमणि अनिरुद्धजीने बाणासुरकी पुत्री ऊषासे विवाह किया था और इस प्रसंगमें भगवान् श्रीकृष्ण और शंकरजीका बहुत बड़ा घमासान युद्ध हुआ था। आप कृपा करके यह वृत्तान्त विस्तारसे सुनाइये॥ १॥

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