श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब अनन्तमूर्ति भगवान् श्रीकृष्णने राजा नृगसे [क्योंकि वे ही इस रूपमें प्रकट हुए थे] इस प्रकार पूछा, तब उन्होंने अपना सूर्यके समान जाज्वल्यमान मुकुट झुकाकर भगवान्को प्रणाम किया और वे इस प्रकार कहने लगे॥ ९॥
इति स्म राजा सम्पृष्टः कृष्णेनानन्तमूर्तिना।
माधवं प्रणिपत्याह किरीटेनार्कवर्चसा॥ ९
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब अनन्तमूर्ति भगवान् श्रीकृष्णने राजा नृगसे [क्योंकि वे ही इस रूपमें प्रकट हुए थे] इस प्रकार पूछा, तब उन्होंने अपना सूर्यके समान जाज्वल्यमान मुकुट झुकाकर भगवान्को प्रणाम किया और वे इस प्रकार कहने लगे॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.64.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 537) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/64/9/