यह बड़े सौभाग्यकी बात है कि पापी कंसको आपलोगोंने मार डाला और अपने सुहृद्-सम्बन्धियोंको बड़े कष्टसे बचा लिया। यह भी कम आनन्दकी बात नहीं है कि आपलोगोंने और भी बहुत-से शत्रुओंको मार डाला या जीत लिया और अब अत्यन्त सुरक्षित दुर्ग (किले) में आपलोग निवास करते हैं’॥ ८॥✎ 1699
दिष्ट्या कंसो हतः पापो दिष्ट्या मुक्ताः सुहृज्जनाः।
निहत्य निर्जित्य रिपून् दिष्ट्या दुर्गं समाश्रिताः॥ ८
यह बड़े सौभाग्यकी बात है कि पापी कंसको आपलोगोंने मार डाला और अपने सुहृद्-सम्बन्धियोंको बड़े कष्टसे बचा लिया। यह भी कम आनन्दकी बात नहीं है कि आपलोगोंने और भी बहुत-से शत्रुओंको मार डाला या जीत लिया और अब अत्यन्त सुरक्षित दुर्ग (किले) में आपलोग निवास करते हैं’॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.65.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 542) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/65/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)