श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.66.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 66 · अथ षट्षष्टितमोऽध्यायः

शंखार्यसिगदाशार्ङ्गश्रीवत्साद्युपलक्षितम् ।

बिभ्राणं कौस्तुभमणिं वनमालाविभूषितम्॥ १३

śaṃkhāryasigadāśārṅgaśrīvatsādyupalakṣitam |

bibhrāṇaṃ kaustubhamaṇiṃ vanamālāvibhūṣitam|| 13

अर्थ

पौण्ड्रकने भी शंख, चक्र, तलवार, गदा, शार्ङ्गधनुष और श्रीवत्सचिह्न आदि धारण कर रखे थे। उसके वक्षःस्थलपर बनावटी कौस्तुभमणि और वनमाला भी लटक रही थी॥ १३॥✎ 1700

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1700 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: काशि-राजके → काशिराजके

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