श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.66.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 66 · अथ षट्षष्टितमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

कत्थनं तदुपाकर्ण्य पौण्ड्रकस्याल्पमेधसः।

उग्रसेनादयः सभ्या उच्चकैर्जहसुस्तदा॥ ७

katthanaṃ tadupākarṇya pauṇḍrakasyālpamedhasaḥ|

ugrasenādayaḥ sabhyā uccakairjahasustadā|| 7

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! मन्दमति पौण्ड्रककी यह बहक सुनकर उग्रसेन आदि सभासद् जोर-जोरसे हँसने लगे॥ ७॥

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