श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.67.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 67 · अथ सप्तषष्टितमोऽध्यायः

एवं देशान् विप्रकुर्वन् दूषयंश्‍च कुलस्त्रियः।

श्रुत्वा सुललितं गीतं गिरिं रैवतकं ययौ॥ ८

evaṃ deśān viprakurvan dūṣayaṃśca kulastriyaḥ|

śrutvā sulalitaṃ gītaṃ giriṃ raivatakaṃ yayau|| 8

अर्थ

इस प्रकार वह देशवासियोंका तो तिरस्कार करता ही, कुलीन स्त्रियोंको भी दूषित कर देता था। एक दिन वह दुष्ट सुललित संगीत सुनकर रैवतक पर्वतपर गया॥ ८॥

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