श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

कौरवोंपर बलरामजीका कोप और साम्बका विवाह

श्रीशुक उवाच

दुर्योधनसुतां राजन् लक्ष्मणां समितिंजयः।

स्वयंवरस्थामहरत् साम्बो जाम्बवतीसुतः॥ १

duryodhanasutāṃ rājan lakṣmaṇāṃ samitiṃjayaḥ|

svayaṃvarasthāmaharat sāmbo jāmbavatīsutaḥ|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जाम्बवतीनन्दन साम्ब अकेले ही बहुत बड़े-बड़े वीरोंपर विजय प्राप्त करनेवाले थे। वे स्वयंवरमें स्थित दुर्योधनकी कन्या लक्ष्मणाको हर लाये॥ १॥✎ 1701

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1701 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: जाम्बवती-नन्दन → जाम्बवतीनन्दन

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