श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

चामरव्यजने शंखमातपत्रं च पाण्डुरम्।

किरीटमासनं शय्यां भुंजन्त्यस्मदुपेक्षया॥ २६

cāmaravyajane śaṃkhamātapatraṃ ca pāṇḍuram|

kirīṭamāsanaṃ śayyāṃ bhuṃjantyasmadupekṣayā|| 26

अर्थ

ये यदुवंशी चँवर, पंखा, शंख, श्‍वेतछत्र, मुकुट, राजसिंहासन और राजोचित शय्याका उपयोग-उपभोग इसलिये कर रहे हैं कि हमने जान-बूझकर इस विषयमें उपेक्षा कर रखी है॥ २६॥✎ 1703

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1703 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: तिल-मिला → तिलमिला

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