श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.68.42

दशम स्कन्ध · अध्याय 68 · अथाष्टषष्टितमोऽध्यायः

जलयानमिवाघूर्णं गंगायां नगरं पतत्।

आकृष्यमाणमालोक्य कौरवा जातसम्भ्रमाः॥ ४२

jalayānamivāghūrṇaṃ gaṃgāyāṃ nagaraṃ patat|

ākṛṣyamāṇamālokya kauravā jātasambhramāḥ|| 42

अर्थ

हलसे खींचनेपर हस्तिनापुर इस प्रकार काँपने लगा, मानो जलमें कोई नाव डगमगा रही हो। जब कौरवोंने देखा कि हमारा नगर तो गंगाजीमें गिर रहा है, तब वे घबड़ा उठे॥ ४२॥

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