यदुवंशशिरोमणि भगवान् बलरामजीने यह सब दहेज स्वीकार किया और नवदम्पति लक्ष्मणा तथा साम्बके साथ कौरवोंका अभिनन्दन स्वीकार करके द्वारकाकी यात्रा की॥ ५२॥
प्रतिगृह्य तु तत् सर्वं भगवान् सात्वतर्षभः।
ससुतः सस्नुषः प्रागात् सुहृद्भिरभिनन्दितः॥ ५२
यदुवंशशिरोमणि भगवान् बलरामजीने यह सब दहेज स्वीकार किया और नवदम्पति लक्ष्मणा तथा साम्बके साथ कौरवोंका अभिनन्दन स्वीकार करके द्वारकाकी यात्रा की॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 560) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/68/52/