श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.10

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

वितानैर्निर्मितैस्त्वष्ट्रा मुक्तादामविलम्बिभिः।

दान्तैरासनपर्यंकैर्मण्युत्तमपरिष्कृतैः ॥ १०

vitānairnirmitaistvaṣṭrā muktādāmavilambibhiḥ|

dāntairāsanaparyaṃkairmaṇyuttamapariṣkṛtaiḥ || 10

अर्थ

विश्‍वकर्माने बहुत-से ऐसे चँदोवे बना रखे थे, जिनमें मोतीकी लड़ियोंकी झालरें लटक रही थीं। हाथी-दाँतके बने हुए आसन और पलँग थे, जिनमें श्रेष्ठ-श्रेष्ठ मणि जड़ी हुई थी॥ १०॥✎ 2127

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2127 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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