श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

ततोऽन्यदाविशद् गेहं कृष्णपत्‍न्याः स नारदः।

योगेश्‍वरेश्‍वरस्याङ्ग योगमायाविवित्सया॥ १९

tato'nyadāviśad gehaṃ kṛṣṇapatnyāḥ sa nāradaḥ|

yogeśvareśvarasyāṅga yogamāyāvivitsayā|| 19

अर्थ

परीक्षित्! इसके बाद देवर्षि नारदजी योगेश्‍वरोंके भी ईश्‍वर भगवान् श्रीकृष्णकी योगमायाका रहस्य जाननेके लिये उनकी दूसरी पत्‍नीके महलमें गये॥ १९॥✎ 1705

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1705 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: यज्ञ-कुण्डोंमें → यज्ञकुण्डोंमें

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