श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

चित्रं बतैतदेकेन वपुषा युगपत् पृथक्।

गृहेषु द‍्व्यष्टसाहस्रं स्त्रिय एक उदावहत्॥ २

citraṃ bataitadekena vapuṣā yugapat pṛthak|

gṛheṣu dvyaṣṭasāhasraṃ striya eka udāvahat|| 2

अर्थ

वे सोचने लगे—अहो, यह कितने आश्‍चर्यकी बात है कि भगवान् श्रीकृष्णने एक ही शरीरसे एक ही समय सोलह हजार महलोंमें अलग-अलग सोलह हजार राजकुमारियोंका पाणिग्रहण किया॥ २॥

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