श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

चरन्तं मृगयां क्वापि हयमारुह्य सैन्धवम्।

घ्नन्तं ततः पशून् मेध्यान् परीतं यदुपुंगवैः॥ ३५

carantaṃ mṛgayāṃ kvāpi hayamāruhya saindhavam|

ghnantaṃ tataḥ paśūn medhyān parītaṃ yadupuṃgavaiḥ|| 35

अर्थ

कहीं श्रेष्ठ यादवोंसे घिरे हुए सिन्धुदेशीय घोड़ेपर चढ़कर मृगया कर रहे हैं, इस प्रकार यज्ञके लिये मेध्य पशुओंका संग्रह कर रहे हैं॥ ३५॥

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