उस अन्तःपुर (रनिवास) में भगवान्की रानियोंके सोलह हजारसे अधिक महल शोभायमान थे, उनमेंसे एक बड़े भवनमें देवर्षि नारदजीने प्रवेश किया॥ ८॥✎ 2127
तत्र षोडशभिः सद्मसहस्रैः समलंकृतम्।
विवेशैकतमं शौरेः पत्नीनां भवनं महत्॥ ८
उस अन्तःपुर (रनिवास) में भगवान्की रानियोंके सोलह हजारसे अधिक महल शोभायमान थे, उनमेंसे एक बड़े भवनमें देवर्षि नारदजीने प्रवेश किया॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 561) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/69/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)