श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.70.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 70 · अथ सप्ततितमोऽध्यायः

संविभज्याग्रतो विप्रान् स्रक्ताम्बूलानुलेपनैः।

सुहृदः प्रकृतीर्दारानुपायुंक्त ततः स्वयम्॥ १३

saṃvibhajyāgrato viprān sraktāmbūlānulepanaiḥ|

suhṛdaḥ prakṛtīrdārānupāyuṃkta tataḥ svayam|| 13

अर्थ

वे पुष्पमाला, ताम्बूल, चन्दन और अंगराग आदि वस्तुएँ पहले ब्राह्मण, स्वजनसम्बन्धी, मन्त्री और रानियोंको बाँट देते; और उनसे बची हुई स्वयं अपने काममें लाते॥ १३॥

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