श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.70.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 70 · अथ सप्ततितमोऽध्यायः

ब्राह्मे मुहूर्त उत्थाय वार्युपस्पृश्य माधवः।

दध्यौ प्रसन्‍नकरण आत्मानं तमसः परम्॥ ४

brāhme muhūrta utthāya vāryupaspṛśya mādhavaḥ|

dadhyau prasannakaraṇa ātmānaṃ tamasaḥ param|| 4

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्ण प्रतिदिन ब्राह्ममुहूर्तमें ही उठ जाते और हाथ-मुँह धोकर अपने मायातीत आत्मस्वरूपका ध्यान करने लगते। उस समय उनका रोम-रोम आनन्दसे खिल उठता था॥ ४॥

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