भगवन्! उस श्रेष्ठ यज्ञमें आपका दर्शन करनेके लिये बड़े-बड़े देवता और यशस्वी नरपतिगण एकत्र होंगे॥ ४२॥✎ 2128
तस्मिन् देव क्रतुवरे भवन्तं वै सुरादयः।
दिदृक्षवः समेष्यन्ति राजानश्च यशस्विनः॥ ४२
भगवन्! उस श्रेष्ठ यज्ञमें आपका दर्शन करनेके लिये बड़े-बड़े देवता और यशस्वी नरपतिगण एकत्र होंगे॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.70.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 573) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/70/42/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)