श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.70.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 70 · अथ सप्ततितमोऽध्यायः

अथाप्लुतोऽम्भस्यमले यथाविधि

क्रियाकलापं परिधाय वाससी।

चकार सन्ध्योपगमादि सत्तमो

हुतानलो ब्रह्म जजाप वाग्यतः॥ ६

athāpluto'mbhasyamale yathāvidhi

kriyākalāpaṃ paridhāya vāsasī|

cakāra sandhyopagamādi sattamo

hutānalo brahma jajāpa vāgyataḥ|| 6

अर्थ

इसके बाद वे विधिपूर्वक निर्मल और पवित्र जलमें स्नान करते। फिर शुद्ध धोती पहनकर, दुपट्टा ओढ़कर यथाविधि नित्यकर्म सन्ध्या-वन्दन आदि करते। इसके बाद हवन करते और मौन होकर गायत्रीका जप करते। क्यों न हो, वे सत्पुरुषोंके पात्र आदर्श जो हैं॥ ६॥

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