श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

श्रीकृष्णभगवान्‌का इन्द्रप्रस्थ पधारना

श्रीशुक उवाच

इत्युदीरितमाकर्ण्य देवर्षेरुद्धवोऽब्रवीत्।

सभ्यानां मतमाज्ञाय कृष्णस्य च महामतिः॥ १

ityudīritamākarṇya devarṣeruddhavo'bravīt|

sabhyānāṃ matamājñāya kṛṣṇasya ca mahāmatiḥ|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णके वचन सुनकर महामति उद्धवजीने देवर्षि नारद, सभासद् और भगवान् श्रीकृष्णके मतपर विचार किया और फिर वे कहने लगे॥ १॥

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