अब अन्तर्यामी भगवान् श्रीकृष्णने वसुदेव आदि गुरुजनोंसे अनुमति लेकर दारुक, जैत्र आदि सेवकोंको इन्द्रप्रस्थ जानेकी तैयारी करनेके लिये आज्ञा दी॥ १२॥
अथादिशत् प्रयाणाय भगवान् देवकीसुतः।
भृत्यान् दारुकजैत्रादीननुज्ञाप्य गुरून् विभुः॥ १२
अब अन्तर्यामी भगवान् श्रीकृष्णने वसुदेव आदि गुरुजनोंसे अनुमति लेकर दारुक, जैत्र आदि सेवकोंको इन्द्रप्रस्थ जानेकी तैयारी करनेके लिये आज्ञा दी॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.71.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 575) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/71/12/