॥ श्रीहरिः ॥
एकदा मातुलेयं वै प्राह राजन् वृकोदरः।
न शक्तोऽहं जरासन्धं निर्जेतुं युधि माधव॥ ४१
ekadā mātuleyaṃ vai prāha rājan vṛkodaraḥ|
na śakto'haṃ jarāsandhaṃ nirjetuṃ yudhi mādhava|| 41
अर्थ
प्रिय परीक्षित्! अट्ठाईसवें दिन भीमसेनने अपने ममेरे भाई श्रीकृष्णसे कहा—‘श्रीकृष्ण! मैं युद्धमें जरासन्धको जीत नहीं सकता॥ ४१॥
एकदा मातुलेयं वै प्राह राजन् वृकोदरः।
न शक्तोऽहं जरासन्धं निर्जेतुं युधि माधव॥ ४१
प्रिय परीक्षित्! अट्ठाईसवें दिन भीमसेनने अपने ममेरे भाई श्रीकृष्णसे कहा—‘श्रीकृष्ण! मैं युद्धमें जरासन्धको जीत नहीं सकता॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.72.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 585) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/72/41/